बुलंद गोंदिया। मिड-डे मिल योजना के तहत विद्यार्थियों को पोषण आहार के नाम पर मवेशियों के चारे से भी घटिया दर्जे का अनाज का वितरण किया जा रहा है। इस तरह का मामला मंगलवार 15 मार्च को गोंदिया जिला परिषद की चंगेरा जिप. स्कूल में सामने आने से शिक्षा विभाग की पोल खुल गई है। वहीं विद्यार्थियों के अभिभावक व जनप्रतिनिधियों में वितरण प्रणाली के खिलाफ तीव्र असंतोष निर्माण हो गया है। अनाज से भरी बोरियों में गुटखा पाऊच की पन्नियां व भूसा अनाज में पाया गया है। जिसका पंचनामा स्कूल पोषण आहार विभाग की ओर से किया गया है।
गौरतलब है कि कक्षा पहली से आठवी तक के विद्यार्थियों को पोषण आहार दिया जाता है। कोरोना संक्रमण के कारण विद्यार्थियों को भोजन के बजाए चावल, मूंगदाल व चने का वितरण किया जा रहा है। अगस्त 2021 से फरवरी 2022 तक का शालेय पोषण आहार जिले की सभी लाभार्थी स्कूलों को वितरित किया गया है। लेकिन वितरित किया गया अनाज इतना घटिया दर्जे का है कि चना और मूंगदाल में भूसा भरा हुआ है। जिसे अनाज के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। फिर भी इस तरह का अनाज विद्यार्थियों को पोषण आहार के नाम पर वितरित किया जा रहा है। गोंदिया पंचायत समिति अंतर्गत चंगेरा जिला परिषद स्कूल में 154 दिन का पोषण आहार के तहत चावल, मूंगदाल व चने का वितरण किया गया। 15 मार्च को जब अनाज की जांच की गई तो चने की बोरियों में भूसा तथा गुटखा पाऊच की पन्नियां पायी गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावक, ग्राम पंचायत के पदाधिकारी व क्षेत्र के जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य स्कूल में पहुंच गए। जब उन्होंने अनाज देखा तो अनाज में उपरोक्त मिलावट पायी गई। घटना की जानकारी स्कूल पोषण आहार व शिक्षा विभाग को दी गई। जानकारी मिलते ही पोषण आहार अधीक्षक देवेंद्र रहांगडाले तथा अन्य कर्मचारी जांच करने पहुंच गए। समाचार लिखे जाने तक जांच प्रक्रिया शुरू थी।
शालेय पोषण आहार के नाम पर मवेशियों के चारे से भी घटिया अनाज का विद्यार्थियों को वितरण चंगेरा जिला परिषद स्कूल का मामला, गुटखों की पन्नी सहित भूसा मिश्रित मिला अनाज





