नाबालिग से दुष्कर्म नराधम आरोपी रुपेश मडावी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास, 2 लाख का जुर्माना

प्रमुख जिला व विशेष सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला
बुलंद गोंदिया। गोंदिया जिले में बाल लैंगिक अत्याचार ,महिलाओं पर अत्याचार तथा हत्या जैसे संगीन मामले में प्रमुख जिला सत्र वह विशेष सत्र न्यायालय द्वारा जल्द से जल्द सुनवाई कर फैसला सुनाते हुए आरोपियों को सजा सुनाई जा रही है। इसी श्रंखला में एक निर्णय 4 मार्च को प्रमुख जिला विशेष सत्र न्यायालय के न्यायधीश एस ए ए आर ओटी द्वारा दिया गया। जिसमें अर्जुनी मोरगांव निवासी आरोपी रुपेश विजय मडावी उम्र 22 वर्ष को साडे 8 वर्ष की नाबालिक के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में दोषी करार देते हुए 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 2 लाख रुपये के जुर्माने की कड़ी सजा सुनाई।
प्रकरण इस प्रकार है कि अर्जुनी मोरगांव थाना अंतर्गत 26 अक्टूबर 2020 की दोपहर 1:00 बजे के दौरान आरोपी रूपेश विजय मडावी द्वारा अपने पड़ोस की 8 वर्ष 8 महीने की नाबालिक के साथ अपने ही घर पर दुष्कर्म किया। इसके पूर्व आरोपी द्वारा उसे एक रुपए देकर चॉकलेट लाने के लिए बोला तथा उसे अपने घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया जिससे पीड़िता रोने लगी वह अपनी मां को इस घटना की जानकारी बताई ।जिसके पश्चात फरियादी द्वारा अर्जुनी मोरगांव पुलिस थाने में पहुंचकर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई ।फरियादी की शिकायत पर तत्कालीन सहायक पुलिस निरीक्षक पी डी भूते, पुलिस उप निरीक्षक अशोक अवचार द्वारा आरोपी के खिलाफ भादवि की धारा 376(अ,ब,ज), सहायक धारा बाल लैंगिक अत्याचार प्रतिबंधक कानून 2012 की धारा 4, 6, 12 के तहत मामला दर्ज कर मामले की गहराई से जांच कर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।
उपरोक्त मामले में न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपी के खिलाफ सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील कृष्णा डी पारधी वह अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता सतीश यू घोड़े द्वारा 8 गवाहों को न्यायालय के समक्ष पेश किया।
गवाहों के बयान चिकित्सा अहवाल व पुलिस रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए प्रमुख जिला व विशेष सत्र न्यायधीश एस ए ए आर ओटी द्वारा बाल लैंगिक अत्याचार संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई तथा दंड न भरने पर आरोपी को 5 वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
दंड की राशि जमा किए जाने पर उपरोक्त राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया। इसके साथ ही मनोधैर्य योजना के अंतर्गत पीड़िता का चिकित्सा उपचार व पुनर्वासन के लिए जिला विधि सेवा प्राधिकरण को सहायता करने का आदेश दिया।
उपरोक्त प्रकरण में पुलिस विभाग की ओर से पुलिस निरीक्षक चंद्रकांत सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में पैरवी अधिकारी मपोहवा गीता ठाकुर अर्जुनी मोरगांव द्वारा विशेष सहयोग दिया गया।

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