बुलंद गोंदिया। बैल पोला के दूसरे दिन राज्य में मारबद का पर्व मनाया जाता है। जिसमें मारबद के पुतले का जुलूस निकालकर ईड़ा पीड़ा घेहूं जा गे मारबद के नारे लगाते हुए भ्रमण कर शहर के बाहर उसका दहन किया जाता है इस वर्ष मारबद के दिन सुबह तेज बारिश व कोरोनावायरस संक्रमण के चलते ते शासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों भी पर्व का उत्साह भी कम नहीं कर पाए। शहर के साथ-साथ जिले के विभिन्न स्थानों में मारबद निकालकर उसका दहन किया गया।

गणेश नगर इलाके में प्रतिवर्ष मारबत उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, गणेश नगर परिसर में मारबत उत्सव मानाने की परंपरा 1950 के दशक में उदलसिंह लिल्हारे (गुरूजी), भोलासिग ठाकुर, खुशीलाल शर्मा(मुख्याध्यापक), भानुजी सोनवाने,इंदल इंदलसिंह लिल्हारे, प्रेमलाल रहमतकर, डॉक्टर गोविंद रहमतकर, फागुजी सोनवाने, श्रावण तिड़के, श्यामराव रामटेक्कर, परसराम इतनकार, रामदास तिड़के आदि ने शुरुवात की थी, इसके पिछे की पौराणिक मान्यता देखी जाय तो भगवान श्रीकृष्णजी के जन्म के बाद कंस राक्षस द्वारा पूतना राक्षसनी को कृष्णजी के स्तनपान कराने हेतु भेजा था, जिसके बाद पूतना अपने स्तनपान कराने के कार्य में सफल तो रही लेकिन स्तनपान कराते वक्त पूतना को जो पीड़ा हुई और गांव बाहर जाकर दम तोड़ दी थी इसी प्रसंग को दोहराते हुए गणेश नगर में अब भी मारबत (पूतना ) का उतसव पिछले 65 वर्षो से निरंतर मनाया जाता है, यहाँ पर हर दुधमुंहा छोटा बालक कृष्ण होता है, और पूतना रुपी (मारबत) के पुतले का स्तनपान भी कराया जाता है,
इसके साथ ही समाज में फैली बुराइयों कुरीतियों के खिलाफ और बिमारियों के भी खिलाफ “घेवून जा गे मरबाद” के उद्घोष के साथ गाव की सीमा पर उसका दहन किया जाता हैं।

श्रीनगर मालवीय स्कूल प्रभाग क्रमांक 17 में मारबद का पर्व मिश्रा परिवार व परिसर के नागरिकों द्वारा अनेक वर्षों से मनाएं मनाया जा रहा है।

फूलचूर राजीव गांधी चौक





