मार्ग चौड़ीकरण के चलते पेड़ों को न काटा जाए सबसे ज्यादा ऑक्सिज देने वाले है पेड़

पिछले कई वर्षो से ऑक्सिज दे रहे है
बुलंद गोंदिया। संवाददता- आमगांव
आज जीवन मे सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण ऑक्सिजन है। कोरोना काल की दूसरी लहर में जो जाने गई है वह अधिकतर ऑक्सिजन कि वजह से गई है ऐसा प्रतीत होता है। आज हम कोरोना के समय दूसरे देशों से ऑक्सिजन मंगवा रहे है। सबसे ज्यादा हमारे देश मे पेड़ो को हमारे पूर्वाजो ने महत्व दिया तथा इन सब पेड़ो को लगाया भी उनके ही द्वारे है। आज भी हम पीपल, बरगद, निम, अवाला जैसे आदि पेड़ो की पूजा करते है। पीपल 24 घंटे, बरगद 20 घण्टे और नीम 18 घण्टे ऑक्सीजन प्रदान करता है। आज आमगांव में अम्बेडकर चौक से लेकर कामठा चौक तक रोड का चौड़ीकरण के चलते कई पीपल, बरगद और नीम के पेड़ है जो है तो साइड में ही पर रोड वहा तक जाने के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि पेड़ बचेंगे नही। पर रोड बनाने वाली कंपनी और उनके अभियंताओं से निवेदन है कि पेड़ो को इस प्रकार बना दिया जाए कि पेड़ कटे भी न और वह आमगांव शहर की शोभा बढ़ाये जिससे शहर में रहने वालों को पर्यावरण से बचा जा सके तथा पेड़ो के कारण बारिश के मौसम में बारिश अच्छी होती है, गर्मी में ठंडी हवा मिलती है और इन्ही पेड़ो की वजह से हमे जीवन भर ऑक्सिजन की कमी नही होती। अंबडेकर चौक से लेकर कामठा चौक तक दोनों तरफ पीपल के पेड़ सबसे ज्यादा लगे हुए है जो पिछले कई वर्षों से हमे छाव, ठंडी हवा व ऑक्सीजन दे रहे है। पेड़ की जो साखाये रोड तरफ झुक रही है उसको भले की काट दिया जाए व पेड़ो पर बने सीमेंट के चबूतरे को हटा दिया जाए तथा पेड़ो को सजावट कर के आकर्षित बनाये जाए जिसकी वजह से पेड़ कटने से भी बचेंगे और शहर स्तिथ पेड़ आकर्षित भी लगेंगे। जिसकी वजह से ऑक्सीजन भी मिल सकेंगे और गर्मी में राहत मिलेगी जिसकी वजह से शहर का तापमान कम रहेंगे और पेड़ो की वजह से बारिश भी अच्छी होगी।।

पेड़ों को काटा ना जाए पर्यायी व्यवस्था करें
अष्टविनायक सामाजिक संस्था के माध्यम से वृक्षारोपण के साथ मे उसकी देख रेख भी। शहर में रोड चौड़ीकरण के वजह से पेड़ो को मत काटा जाए क्यों कि जो पेड़ लगे हुए है वह सबसे ज्यादा ऑक्सिजन देने वाले पेड़ है। यह पेड़ पिछले कई वर्षों से लगे हुए है। अगर इनको काटा गया तो फिर लगाना और उगाना असंभव है। रोड बनाने वाली कंपनी इन पेड़ों को आकर्षित बना कर बचा सकती है। जिसकी वजह से पर्यावरण में सुद्ध हवा मिल सके।
रोहित गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, आमगांव।

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