बुलंद गोंदिया। वन्यजीवों की तस्करी के खिलाफ राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), नागपुर की क्षेत्रीय इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देवरी तहसील के देवरी-पूराडा मार्ग पर मोहनटोला परिसर से बिबट (तेंदुए) की खाल जब्त की है। इस मामले में दो तस्करो को हिरासत में लिया गया। की गई इस कार्रवाई से क्षेत्र में वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।उपरोक्त कार्यवाही 29 सितंबर को की गयी।
इस मामले में हिरासत में लिए गए आरोपियों की पहचान धनराज रामलाल उईके (35), निवासी ढिवरींटोला, तहसील देवरी तथा नीलकंठ रामचंद्र पंधरे (37), निवासी श्रीरामनगर, तहसील सड़क अर्जुनी के रूप में हुई है।
गुप्त सूचना पर डीआरआई ने बिछाया जाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीआरआई नागपुर की टीम को देवरी क्षेत्र में बिबट (तेंदुए) की खाल का गुप्त सौदा होने की सूचना मिली थी। इसके आधार पर टीम ने देवरी-पूराडा मार्ग के मोहनटोला परिसर में जाल बिछाया। संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने पर टीम ने दोनों व्यक्तियों को हिरासत में लेकर तलाशी ली।
इस दौरान उनके पास एक सफेद कपड़े में सावधानीपूर्वक लपेटकर रखी गई पूर्ण विकसित बिबट (तेंदुए) की खाल बरामद हुई। टीम ने पंचों की उपस्थिति में घटनास्थल का पंचनामा कर खाल सहित संबंधित सामग्री जब्त कर ली।
कहां हुआ बिबट (तेंदुए) का शिकार, किसे बेची जानी थी खाल?
इस कार्रवाई के बाद वन विभाग के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। नवेगांव नागझिरा टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र अथवा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र से की गई है। खाल आरोपियों तक किसने पहुंचाई और इसे आगे कहां बेचा जाना था? क्या इस कारोबार के पीछे कोई अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह सक्रिय है?
इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा जांच की जा रही है। जांच में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
उत्तर देवरी वन विभाग को मामला सुपुर्द
बिबट वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित प्राणी है। इसकी खाल का अवैध कब्जा, खरीद-बिक्री और परिवहन गंभीर अपराध है। डीआरआई की टीम ने प्राथमिक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब्त खाल, संबंधित दस्तावेज और दोनों संदिग्धों को आगे की जांच एवं कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तर देवरी वन विभाग के सुपुर्द कर दिया है।
वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद
देवरी क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई से वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनकी खाल की तस्करी को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। अब वन विभाग की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बिबट की खाल कहां से लाई गई थी, इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं और तस्करी का नेटवर्क किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।






