बुलंद गोंदिया।(संवाददाता सालेकसा )। सालेकसा नगर पंचायत चुनाव की एवं छेड़खानी के मामले में जिलाधिकारी द्वारा चुनाव निर्णय अधिकारी तहसीलदार आमगांव मोनिका कांबळे का तबादला कर अर्जुनी मोरगांव के तहसीलदार को प्रभार सौपा। राजनीतिक दलों द्वारा मोर्चा निकाल कर तहसीलदार व चुनाव निर्णय अधिकारी के निलंबन की मांग की इस घटना के चलते तहसील कार्यालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर छावनी में तब्दील किया गया।
गौरतलब है की 2 दिसंबर को सालेकसा नगर पंचायत के चुनाव संपन्न हुए थे 3 दिसंबर को मशीनों की जांच के लिए बिना किसी राजनीतिक दलों के पदाधिकारी व उम्मीदवारों को सूचना न देकर चुनाव निर्णय अधिकारी व तहसीलदार मोनिका कांबळे द्वारा स्ट्रांग रूम खुलवाकर मशीनों की जांच शुरू कर दी थी।
इस मामले में नागरिकों को मशीनों से छेड़खानी होने की जानकारी मिलते ही हजारों की संख्या में नागरिक व राजनीतिक दलों के पदाधिकारी तहसील कार्यालय में पहुंचकर हगामा किया जो देर रात तक चलता रहा।
जिस पर जिलाधिकारी प्रजित नायर द्वारा चुनाव निर्णय अधिकारी को उसके पद से तत्काल हटाकर उपरोक्त पदभार अर्जुनी मोरगांव के तहसीलदार अनिरुद्ध कांबले को नियुक्त कर सोपा गया।
उल्लेखनीय की स्ट्रांग रूम खोलकर क्लोजर बटन की जांच करने का आदेश चुनाव आयोग द्वारा दिया गया था किंतु इस संदर्भ में नियम 19 के तहत राजनीतिक दलों के पदाधिकारी उम्मीदवार व उनके प्रतिनिधियों को सूचना देकर स्ट्रांग रूम में खुलवा कर उनके सामने जांच की जानी थी किंतु मोनिका कांबळे द्वारा इस मामले में लापरवाही बढ़ाते हुए किसी को भी सूचना न देकर क्लोजर बटन की जांच का कार्य शुरू किया था।
सभी राजनीतिक दलों का मोर्चा अधिकारी के निलंबन की मांग
गुरुवार 4 दिसंबर को भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारी कार्यकर्ता व नागरिकों द्वारा मोर्चा निकालकर दोषी चुनाव निर्णय अधिकारी के निलंबन की मांग की।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं व नागरिकों के आक्रोश को देखते हुए तहसील कार्यालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर संपूर्ण क्षेत्र को छावनी के रूप में तब्दील किया गया।
राजनीतिक माहौल गर्म जांच की मांग
ईवीएम प्रकरण ने तहसील के साथ संपूर्ण जिले व राज्य में चुनावी माहौल को गर्म कर दिया विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी द्वारा इसे गंभीर चुक बताते हुए इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है कई नेताओं ने मांग की कि यदि ईवीएम की सुरक्षा में गड़बड़ी हुई तो चुनावी प्रक्रिया भी संदिग्ध हो जाती है।
ग्रामीण मतदाताओं में चिंता निर्माण
लोकतंत्र के इस महा पर्व में इस प्रकार की घटना होने से मतदाताओं में निष्पक्ष चुनाव को लेकर अविश्वास व चिंता का माहौल बन गया है। मतदाताओं का कहना है कि यदि चुनावी प्रक्रिया में जब पारदर्शिता ही नहीं होगी तो उनका भरोसा कैसे इस लोकतंत्र के इस महापर्व पर रहेगा।






