बेधड़क बिना मंजूरी के अवैध रूप से नगर परिषद की दुकानों का निरंतर नवनिर्माण धृतराष्ट्र बना नगर परिषद प्रशासन

बुलंद गोंदिया। गोंदिया शहर में नगर परिषद नाम की संस्था का अस्तित्व विहीन है चुकी है। नगर परिषद के मालकियत की दुकानों का बिना मंजूरी के बेधड़क निर्माण कार्य शुरू है मंजूरी के बिना नवनिर्मित दुकानों का बढ़ा हुआ किराया न देकर राजस्व का करोड़ों रुपए का नुकसान किया जा रहा है फिर भी नगर परिषद प्रशासन धृतराष्ट्र की भूमिका में दिखाई दे रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गोंदिया शहर के कपड़ा बाजार परिसर स्थित तीन दुकानों का रिपेयरिंग के नाम पर नवनिर्माण किया जा रहा है. जबकि वह दुकान नगर परिषद के मालकियत की होने के चलते नियम अनुसार नगर परिषद से रिपेयरिंग के लिए मंजूरी लेना आवश्यक होता है लेकिन नगर परिषद की धृतराष्ट्र कार्य प्रणाली के चलते इन किराएदारों के हौसले बुलंद हो चुके हैं।

कन्हैयालाल गोकुलदास वटवानी दुकान नंबर 48/18 ,धनराज गोकुलदास वतवानी दुकान नंबर 45/18 गोकुलदास टहलनदास वतवानी दुकान नंबर 40 /10 का निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर शुरू है।
इस संदर्भ में नगर परिषद प्रशासन के बाजार विभाग से जानकारी प्राप्त करने पर पता चला कि उपरोक्त दुकानों के रिपेयरिंग या नव निर्माण के लिए किसी भी प्रकार की मंजूरी नहीं दी गई है उसके बावजूद भी बेधड़क दुकान का नवनिर्माण किया जा रहा है विशेष उल्लेखनीय की नगर परिषद के मालकियत की दुकान की रिपेयरिंग मंजूरी ले कर की जा सकती है जबकि उसका नवनिर्माण नहीं किया जा सकता।

रिपेयरिंग के नाम पर नवनिर्माण नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां
गोंदिया नगर परिषद के मालकियत की दुकान बरसों पुरानी हो चुकी है जिसमें गत कुछ समय से रिपेयरिंग की मंजूरी के नाम पर बड़े पैमाने पर दुकानों का नवनिर्माण किया जा रहा है जबकि उपरोक्त दुकान प्रथम तल की ही मंजूर है लेकिन नवनिर्माण कर दो मंजिला इमारत दुकानें बनाई जा रही है जिसमें नियम के अनुसार प्रथम ग्राउंड फ्लोर वह प्रथम मंजिला का किराया भी 5 गुना नगर परिषद को देना होता है लेकिन अब तक जितनी भी दुकानों का नव निर्माण हुआ है अधिकांश दुकानदारों द्वारा इसका जुर्माना वह 5 गुना किराया नहीं दिया जिससे नगर परिषद को गत कुछ वर्षों में करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचा है।

राजनीतिक संरक्षण
गोंदिया नगर परिषद के मार्केट की दुकानों केरिपेयरिंगव निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के चलते अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती तथा राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाते हुए वह भी अपनी जेब गर्म कर रहे हैं तथा अघोषित रूप से उन्हें मंजूरी दे रहे हैं।

दुकान हजारों किराया नाम मात्र
गोंदिया नगर परिषद मार्केट की करीब 1100 से अधिक दुकानें हैं लेकिन वार्षिक किराया मात्र 50 से 55 लख रुपए है जिसे भी किराएदारो द्वारा समय पर जमा नहीं कराया जाता ,जबकि हर 10 वर्ष में 10% किराया वृद्धि का नियम है लेकिन उसका भी पालन नहीं किया जा रहा है जिसके चलते जो किराया करोड़ों रुपए में प्राप्त होना था उसे पर ग्रहण लग चुका है।

सैकड़ो दुकानों का नवनिर्माण मंजूरी नाम मात्र की
बाजार परिसर स्थित सैकड़ो दुकानों का नव निर्माण कर दो मंजिला तक किया गया है जिसका किराया बढ़ोतरी नहीं हुई है साथ ही कुछ दुकान किरायेदारों द्वारा ही रिपेयरिंग के नाम पर मंजूरी लेकर नवनिर्माण किया गया है जिनकी भी संख्या नाम मात्र ही है ।

1 महा पूर्व नवनिर्माण शुरू करवाई कुछ नहीं
कपड़ा लाइन में बजाज कपड़ा दुकान की दुकान का निर्माण शुरू किया गया था लेकिन जिस पर भी नगर परिषद प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं किए जाने के चलते अन्य किराएदारों के हौसले बुलंद हो रहे हैं जिसके चलते भविष्य में और दुकानों का निर्माण बड़े पैमाने पर होगा वह नगर परिषद प्रशासन को फिर किराया वह राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बाजार विभाग प्रमुख से संपर्क नहीं
गोंदिया नगर परिषद के मालकियत की दुकान कपड़ा लाइन में चल रहे हैं निर्माण के संदर्भ में और अधिक जानकारी के मामले में जब बाजार विभाग प्रमुख राकेश सवालाखे से संपर्क किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

नगर परिषद बाजार विभाग की कार्यप्रणाली संदेहास्पद
गोंदिया नगर परिषद मालकिन की दुकानों पर नियंत्रण किराया वसूली वह शहर में दुकानों के नव निर्माण हुआ रिपेयरिंग से संबंधित संपूर्ण जानकारी नगर परिषद बाजार विभाग को होनी चाहिए उसके बावजूद भी नगर परिषद का बाजार विभाग द्वारा इस और आंखें बंद कर बैठा हुआ है। जिसे बाजार विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह प्रश्न चिन्ह लग रहा है।

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