गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुचारु रखने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा राज्य में नियंत्रण कक्ष; जिला स्तरीय समितियों का गठन

* पिछले छह महीनों की तुलना में अधिक मात्रा में घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध
* अत्यावश्यक सेवाओं को एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता
* राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं
* सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ कार्रवाई
* अफवाहों पर विश्वास न करने की नागरिकों से अपील

बुलंद गोंदिया। (मुंबई)- ईरान–इज़राइल युद्ध की पृष्ठभूमि में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न उपाय शुरू किए हैं। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए और संभावित कमी की स्थिति में बेहतर समन्वय हो सके, इसके लिए राज्य सरकार ने जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित करने का निर्णय लिया है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने संबंधित सभी एजेंसियों को राज्यभर में एलपीजी आपूर्ति सुचारु रखने तथा वितरण पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

विभाग ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नियमित रूप से जारी रहेगी और किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है।

मार्च महीने में पिछले छह महीनों की तुलना में अधिक मात्रा में घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं। युद्ध की पृष्ठभूमि में घरेलू गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन
घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा न आए और संभावित कमी की स्थिति में समन्वय सुनिश्चित हो सके, इसके लिए जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी तथा सभी सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे।

इन समितियों की मुख्य जिम्मेदारी गैस आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगी।

मुंबई–ठाणे राशनिंग क्षेत्र में नियंत्रक (रेशनिंग) के अधीन एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें पुलिस उप आयुक्त और उपनियंत्रक (रेशनिंग) शामिल होंगे। मुंबई और ठाणे शहर के सभी उपायुक्तों के साथ समन्वय सह-पुलिस आयुक्त (प्रशासन) द्वारा किया जाएगा।

प्रशासन ने वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की संभावनाओं की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। इसमें कोयला, मिट्टी का तेल आदि विकल्पों पर विचार किया जाएगा, हालांकि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य रहेगा। जिला स्तरीय समितियों को होटल और रेस्टोरेंट संगठनों के साथ बैठक कर वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अत्यावश्यक सेवाओं को एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता
अस्पताल, सरकारी छात्रावास, सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के मेस, मध्याह्न भोजन योजना, सरकारी आश्रमशालाएं आदि जैसी अत्यावश्यक सेवाएं देने वाली संस्थाओं को घरेलू और व्यावसायिक गैस की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। ऐसी संस्थाओं की सूची भी जारी की जाएगी तथा इनके लिए अलग प्राथमिकता क्रम तय किया जाएगा।

गैस आपूर्ति को लेकर अफवाहें न फैलें, इसके लिए प्रतिदिन रेडियो, एफएम, दूरदर्शन तथा प्रिंट मीडिया के माध्यम से जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय तथा जिला समितियां जिम्मेदारी निभाएंगी। सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी और भ्रामक खबरों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
तेल कंपनियों को गैस बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवाओं में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही राज्य, संभाग, जिला और तालुका स्तर पर नियंत्रण कक्ष शुरू किए जाएंगे और शिकायत निवारण के लिए व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

आगामी धार्मिक त्योहारों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक संस्थाओं को एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

गैस आपूर्ति को लेकर नागरिकों में किसी प्रकार की घबराहट न हो, इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत सदस्यों की मदद लेने के निर्देश दिए गए हैं। एलपीजी परिवहन करने वाले वाहनों तथा गैस एजेंसियों को आवश्यक पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को दी गई है।

जिला प्रशासन, राशनिंग नियंत्रक और तेल कंपनियों को प्रतिदिन स्टॉक की स्थिति और अद्यतन रिपोर्ट राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष को भेजना अनिवार्य किया गया है।

राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं
महाराष्ट्र में प्रतिदिन औसतन लगभग 9,000 मीट्रिक टन एलपीजी की मांग होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन बढ़ा दिया गया है और पिछले दो दिनों में दैनिक उत्पादन 9,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर लगभग 11,000 मीट्रिक टन कर दिया गया है। इसलिए राज्य में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त उत्पादन तथा भंडार उपलब्ध है।

व्यावसायिक एलपीजी के मामले में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्राथमिकता तय की गई है। इसके तहत अस्पताल, स्कूलों की मध्याह्न भोजन योजना, आश्रमशालाएं, सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) तथा सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के मेस जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इसी प्रकार राज्य में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बाजार की मांग पूरी करने के लिए राज्य की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और प्रतिदिन लगभग 15,000 किलोलीटर पेट्रोल तथा 38,000 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की जा रही है।

विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि ईंधन आपूर्ति को लेकर किसी प्रकार की चिंता न करें, क्योंकि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

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