प्रेम के प्रतीक सारस पंछियों की घटती संख्या बन रही चिंता का कारण 3 वर्षों में 45 से 31 की संख्या पर पहुंचे सारस संवर्धन के 64 करोड़ का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय में खा रहा धूल

बुलंद गोंदिया। प्रेम के प्रतीक के रूप में जाना जाने वाला सारस पंछी पूरे महाराष्ट्र में सिर्फ गोंदिया जिले में ही पाया जाता है. किंतु अब उसकी घट रही संख्या चिंता का विषय बन रहा है। शासन द्वारा सारस पक्षियों का संवर्धन कर 1लाख पंछियों की संख्या पहुंचाने का दावा किया जा रहा हैं। तथा गत कुछ समय पूर्व न्यायालय के आदेश से सारस संवर्धन के लिए विभिन्न विभागों द्वारा 64 करोड़ का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय में भेजा गया था जो वहां धूल खा रहा है।

गौरतलब है कि प्रतिवर्ष अनुसार 17 से 23 जून के दौरान 1 सप्ताह तक सारस पंछी गनना की गई थी जिसमें जिसमें काफी निराशाजनक आंकड़े सामने आए हैं। गोंदिया जिले में मात्र 31 सारस पंछी ही पाए गए हैं तथा भंडारा में 4 सारस पंछी गनना में पाए गए।
जबकि महाराष्ट्र के इन दोनों जिलों से अधिक मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में सारस पंछियों की संख्या 49 पाई गई जिससे यह गोंदिया जिले के लिए एक दुखद खबर है।

उल्लेखनीय है कि सारस पंछियों के संरक्षण व संवर्धन को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी जिस पर न्यायालय द्वारा वन विभाग व जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाकर सारस पंछियों के संवर्धन एवं संरक्षण व उनके अधिवास का जल्द से जल्द उपाय योजना करने की करने का आदेश दिया था, किंतु उसके बावजूद भी संबंधित प्रशासन द्वारा अब तक किसी भी प्रकार की उपाय योजना नहीं की गई है जिसके चलते जिले में सारस पंछियों की संख्या में कमी आ रही है।

सारस पंछियों के 3 वर्ष के आंकड़े
सारस पंछियों के गोंदिया जिले में गत 3 वर्षों के आंकड़े देखे देखा जाए तो वर्ष 2020 में 45, वर्ष 2021 में 39, वर्ष 2022 में 34 वर्ष 2023 में 31 सारस पाए गए हैं तथा 3 वर्षों में सारस पंछियों की संख्या में इजाफा होने की जगह 14 पंछियों की कमी दर्ज हुई है जो यह जिले के लिए चिंता का विषय बन रहा है।

संवर्धन के लिए विभिन्न विभागों का 64 करोड़ का प्रस्ताव
न्यायालय के कड़ी फटकार के पश्चात जिला प्रशासन द्वारा सारस संवर्धन के लिए विभिन्न विभागों की एक संयुक्त समिति का गठन कर इसके उपाय योजना का प्रारूप बनाया था जिसमें महावितरण, वन विभाग, कृषि विभाग, सिंचाई विभाग वह जिला प्रशासन व अन्य विभागों द्वारा 64करोड़ का प्रस्ताव बनाकर महाराष्ट्र शासन के वित्त मंत्रालय को भेजा किंतु अब तक उस पर किसी भी प्रकार का निर्णय नहीं होने की जानकारी प्राप्त हुई है जिससे सारा संवर्धन की फाइल वित्त मंत्रालय में धूल खा रही है यदि इस पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में हम प्रेम के प्रतीक सारस पंछियों को सिर्फ किताबों वह वीडियो में ही देख पाएंगे तथा गोंदिया जिले की यह विशिष्ट पहचान को हम खो देंगे जो महाराष्ट्र की शान है।

सारस पक्षी गणना में पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण तथा संवर्धन पर निरंतर कार्य करने वाली सेवा संस्था ने वनविभाग के साथ तथा स्वयंसेवी संस्थाओं व किसानों के साथ मिलकर सारस गणना की थी। इसके लिए 39 टीम गोंदिया में बालाघाट में 25 टीम बनाई गई। सुबह 5 बजे से 9 बजे तक अलग अलग टीम सदस्यों ने सारस के अधिवास, बाघ नदी, वैनगंगा नदी तथा तालाबों पर जाकर गणना की।

Share Post: