बुलंद गोंदिया। गोंदिया जिला सारस पक्षी के अधिवास के रूप में पहचाना जाता है किंतु गत कुछ दिनों से सारस पंछियों की आकस्मिक मौत हो रही है इसी के चलते 25 नवंबर को एक सारस का बच्चा गंभीर बीमारी अवस्था में पाया गया था जिसे उपचार के लिए नागपुर के गोरेवाडा चिकित्सालय में भेजा गया था जहां उसकी उपचार के दौरान 1 दिसंबर की शाम मौत हो गई।
गौरतलब है कि गोंदिया जिले की पहचान प्रेम के प्रतीक सारस के पंछी के रूप में होने लगी है। जिसके लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपए की निधि संवर्धन के लिए खर्च की जा रही है किंतु गत कुछ दिनों से सारस पंछियों की आकस्मिक मौत होने के चलते सारस संवर्धन पर प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों पर प्रश्नचिन्ह निर्माण होने लगा है। इसके पूर्व एक सारस के जोड़े की विद्युत करंट लगने से मौत हो गई थी जिसके यह मामला ठंडा हुआ ही नहीं था कि एक सारस पंछी का बच्चा डंगोरली परिसर में दलदल में गंभीर बीमार अवस्था में पाया गया था। जिसकी जानकारी वन विभाग को परिसर के नागरिकों द्वारा दिए जाने पर वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा पहुंचकर उसे उपचार के लिए नागपुर के गोरेवाडा पशु संग्रहालय में उपचार के लिए ले जाया गया था। जहां जांच में यह सामने आया कि उसे फूड प्वाइजनिंग हो गई थी जहां उपचार के दौरान उसकी स्थिति में सुधार होने लगा था किंतु 1 दिसंबर की शाम अचानक उसकी मौत हो गई।
विशेष यह है कि दलदल में काफी समय तक फंसे रहने के चलते उसके पंख खराब हो चुके थे जिससे उड़ने में सहायक नहीं हो रहे थे।
उपचार के दौरान स्थिति में हो रहा था सुधार
सारस के बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसे उपचार के लिए नागपुर के गोरेवाडा प्राणी संग्रहालय में पशु चिकित्सकों की देखरेख में उपचार किया जा रहा था उपचार के दौरान उसकी स्थिति में सुधार हो रहा था किंतु अचानक उसकी मौत हो गई।
एस.जे दुरानी वन क्षेत्र सहायक दासगांव गोंदिया।
सारस के बच्चे की उपचार के दौरान मौत जख्मी अवस्था में उपचार के लिए भेजा गया था नागपुर







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