बाल यौन शोषण आरोपी शब्बीर अहमद को 2 वर्ष का सश्रम कारावास 20 हजार दंड

बुलंद गोंदिया। रामनगर पुलिस थाना अंतर्गत आने वाले रामनगर निवासी आरोपी शब्बीर अहमद खान उम्र 53 वर्ष को ढाई वर्षीय नाबालिग का यौन शोषण करने के आरोप में दोषी करार देते हुए प्रमुख जिला व विशेष सत्र न्यायाधीश एस ए ए आर ओटी द्वारा 2 वर्ष के सश्रम कारावास वह 20 हजार रुपये दंड की सजा सुनाई ।
गौरतलब है कि गोंदिया न्यायालय के विशेष कोर्ट विशेष सत्र न्यायालय द्वारा गत कुछ समय से दुष्कर्म हत्या के मामलों में जल्द से जल्द निर्णय दिया जा रहा है। जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाने के साथ ही आरोपियों में हड़कंप मचा हुआ है।
इसी प्रकार का एक निर्णय 2 मार्च को दिया गया जिसमें बाल यौन शोषण के मामले में दोषी आरोपी को 2 साल का सश्रम कारावास व 20 हजार का दंड लगाया गया है।
प्रकरण इस प्रकार है कि 9 मार्च 2020 की दोपहर 2:30 बजे के दौरान आरोपी शब्बीर अहमद खान उम्र 53 वर्ष द्वारा पड़ोसी की ढाई साल की बालिका जो आंगन में खेल रही थी जिसे आरोपी द्वारा समोसा खिलाने का लालच देकर उसे अपने घर ले गया वह और यौन शोषण का प्रयास किया जब पीड़िता की मां उसे तलाश करती भी वहां पहुंची तो इस घटना से दहल गई तथा उसने आरोपी के चुंगल से बच्ची को छुड़ाकर जोर से चिल्लाया तथा ढाई साल की बच्ची द्वारा इस घटना की जानकारी अपनी मां मामा व अन्य को इशारे से बताई जिसके पश्चात बच्ची को न्याय मिले वह आरोपी द्वारा इस प्रकार की घटना दोबारा न किया जाए इसे लेकर रामनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई जहां आरोपी के खिलाफ बाल लैंगिक अत्याचार प्रतिबंधक कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उपरोक्त मामले की जांच तत्कालीन पुलिस अधिकारी अविनाश मते द्वारा कर आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया।
उपरोक्त प्रकरण में आरोपी के खिलाफ सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील कृष्णा डी पारधी द्वारा पांच गवाहों को न्यायालय के समक्ष पेश किया तथा चिकित्सा अहवाल के आधार पर प्रमुख जिला सत्र न्यायाधीश व विशेष सत्र न्यायाधीश एस ए ए आर ओटी द्वारा बाल लैंगिक अत्याचार संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 12 के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास व 20 हजार दंड की सजा सुनाई तथा दंड की राशि ना भरने पर आरोपी को 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा तथा प्राप्त राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया गया।
मामले में पुलिस विभाग की ओर से पैरवी अधिकारी मापोसी नमिता लांजेवर व सुनीता लिल्हारे द्वारा न्यायालय कार्य में सहयोग दिया गया।

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