लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का राज्य के गृहमंत्री ने किया अपमान, पालक मंत्री की पत्रकार परिषद का पत्रकारों ने किया बहिष्कार,जिलाधिकारी की भूमिका निष्क्रिय

बुलंद गोंदिया। जिलाधिकारी कार्यालय में 27 जनवरी को जिला नियोजन समिति की सभा के पश्चात 1:30 बजे आयोजित पत्रकार परिषद में पत्रकारों को कार्यालय में प्रवेश नहीं दिया गया तथा उन्हें मुख्य द्वार पर ही रोका गया। इस मामले में जानकारी प्राप्त हुई की जिला अधिकारी के निर्देश पर पत्रकारों को रोका गया विशेष यह है की पत्रकार परिषद के लिए बुलाने के बावजूद रोका जाना तथा इस घटना के पश्चात गृहमंत्री तथा जिले के पालक मंत्री अनिल देशमुख द्वारा पत्रकारों से नहीं मिलकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान किया गया। विशेष यह है कि जिला नियोजन समिति की सभा के पश्चात विभिन्न विकास कार्यो के संदर्भ में जानकारी देने के लिए पालक मंत्री द्वारा पत्र परिषद लेने की परंपरा है। जिसके अनुसार जिला माहिती अधिकारी द्वारा दोपहर 1:30 बजे पत्रकारों को आमंत्रित किया गया था। जब पत्रकार जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचे तो पुलिस विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की सूचना ना होने की जानकारी देकर उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। उल्लेखनीय है कि जिला नियोजन समिति के सचिव जिलाधिकारी होते हैं, तथा उनके निर्देश अनुसार ही जिला सूचना अधिकारी द्वारा पत्र परिषद का आयोजन किया जाता है। इस संदर्भ में पुलिस विभाग को जानकारी ना देना यह शोध का विषय है। प्रशासन की इस तानाशाही के चलते सभी समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों द्वारा पत्रकार परिषद का बहिष्कार करने का निर्णय लिया सभा के समाप्त होने के पश्चात गृहमंत्री व पालक मंत्री अपने दल के साथ जब बाहर निकले तो मुख्य द्वार पर सभी समाचार पत्र के प्रतिनिधि उपस्थित थे। लेकिन गृहमंत्री द्वारा किसी भी प्रकार की बात ना कर अपने वाहन में ही बैठकर आश्वासन दिया कि आगे से ऐसा नहीं होगा और वह निकल गए। इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला नियोजन अधिकारी द्वारा समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों से संपर्क कर पत्रकार परिषद में आने के लिए विनंती की किंतु प्रशासन द्वारा लापरवाही बरतने तथा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों के अपमान किए जाने के चलते उपरोक्त बात पालक मंत्री के सामने रखे जाने मांग की थी लेकिन मंत्री द्वारा इस मांग की ओर अनदेखी की गई जिसके चलते लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान किया गया ।
सांसद प्रफुल्ल पटेल की मूक भूमिका
पत्रकारों द्वारा पत्रकार परिषद का बहिष्कार किए जाने के पश्चात मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना देकर पालक मंत्री से मिलने की मांग की गई, इस दौरान पालक मंत्री सांसद प्रफुल्ल पटेल के वाहन में बैठकर बाहर आए लेकिन सांसद पटेल व मंत्री द्वारा वाहन से उतर कर पत्रकारों से मिलना भी उचित नहीं समझा विशेष यह है कि सांसद पटेल जिले के स्थानीय नेता होने के चलते उनसे पत्रकार उनको भारी अपेक्षा थी लेकिन वे उस अपेक्षा को भंग कर मूक भूमिका में दिखाई दिए, जिसके चलते सांसद पटेल के खिलाफ भी पत्रकारों में रोष दिखाई दिया।
पत्रकारों पर बंदी माफियाओं को प्रवेश
पत्रकार परिषद का निमंत्रण दिए जाने के बावजूद एक और पत्रकार उनको मुख्य प्रवेश द्वार पर ही रोका गया वही चल रही सभा के दौरान रेती माफिया, शासन का करोड़ों बकाया राइस मिल मालिक, तथा शराब विक्रेताओं को प्रवेश दिया गया जिससे शासन की इस नीति के खिलाफ पर प्रश्न चिन्ह निर्माण हो रहा है।
आम जनता का क्या हाल होगा
प्रशासन द्वारा ही निमंत्रण देकर बुलाए गए पत्रकारों का अपमान किया जाना पालक मंत्री द्वारा पत्रकारों से नहीं मिलना जबकि पत्रकार उनका शासन प्रशासन के साथ निरंतर तालमेल होना चाहिए जिसका पूरी तरह अभाव दिखा इसके चलते आम नागरिकों का क्या हाल होता होगा ऐसा प्रश्न आज निर्माण हुआ है।

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