नप मालकियत की दुकानों का बिना मंजूरी के निर्माण करने वालों पर प्रशासन कब करेगा कार्रवाई, 1092 किरायेदारों को एक माह में दुकान खाली करने का दिया नोटिस

बुलंद गोंदिया। गोंदिया नगर परिषदमालकियत की दुकानों को बिना प्रशासन की मंजूरी के नवनिर्माण कर नप के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों पर नगर परिषद प्रशासन द्वारा कब कार्रवाई की जाएगी इस पर प्रश्न चिन्ह निर्माण हो रहा है। हाल ही में नगर नप प्रशासन द्वारा 1092 किराएदारों को एक माह में दुकान खाली करने का नोटिस दिया है।

गौरतलब है की गोंदिया नगर परिषद के मालकियत की शहर में1402 दुकाने हैं। जिनका महाराष्ट्रनगर परिषद नगर पंचायत अधिनियम के तहत किए गए करारनामे में किराएदार 3 वर्ष तक तथा रिनिवल करवा कर अधिकतम 9 वर्ष तक किराएदार के रूप में रहता है।
उसके पश्चात दुकान नगर परिषद प्रशासन को सौंप कर फिर से नएकरारनामे के अनुसार किराया बढ़ाकर लिया जा सकता है।
लेकिन गोंदिया नगर परिषद के अंतर्गत किराएदार से गत 30 से 40 वर्षों से ना तो किराया बढ़ाया गया बड़ा है ना ही नए सिरे से करारनामे किए गए हैं। जिसके चलते पुरानी दर से ही नगर परिषद को काफी कम किराया प्राप्त होने से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए केराजस्व का नुकसान हो रहा है। जिसे देखते हुए 24 दिसंबर 2019 की तत्कालीन कार्यकारीनी द्वारा आम सभा में प्रस्ताव लेकर नगर परिषद द्वारा अपनी मालकियत की दुकाने अपने कब्जे में लेकर फिर से नीलाम करने का प्रस्ताव पारित किया था, किंतु कॉविड महामारी होने के चलते यह प्रस्ताव उस समय अमल में नहीं आ पाया था तथा 4 वर्ष तक प्रशासक राज में भी इस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।


हाल ही में नगर परिषद प्रशासन द्वारा नगर परिषद के राजस्व को बढ़ाने के लिए नियम के अधीन रहते हुए 1092 किराएदारों को नोटिस देकर एक माह में दुकान नगर परिषद को सौंप कर फिर से नीलामी या संबंधित किराएदार को नए करारनामे के अंतर्गत देने का नोटिस दिया है।

दुकान का नव निर्माण प्रशासन के राजस्व को नुकसान
गोंदिया नगर परिषद माल कियत के अंतर्गत की दुकानों की स्थिति खराब बताकर उसका नवनिर्माण किया जा रहा है किंतु नगर परिषद नियमानुसार प्रशासन से मंजूरी लेकर यथा स्थिति जो निर्माण किया जाना चाहिए लेकिन सैकड़ो किराएदारों द्वारा नगर परिषद प्रशासन से नियमानुसार मंजूरी न लेते हुए मनमर्जी तरीके से तीन-तीन मंजिला दुकानों का निर्माण किया गया है तथा निर्माण करने के पश्चात नगर परिषद को वर्तमान किराए की दर से भी भुगतान न कर अब तक प्रशासन के राजस्व को करोड़ों रुपए के नुकसान का चूना लगाया जा चुका है जिस पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई कर उनसे उसकी भरपाई कब की जाएंगी इस पर प्रश्न चिन्ह लगता हुआ दिखाई दे रहा है।

दुकानों की बिक्री, दूसरे के नाम से ट्रांसफर
नगर परिषद मालकियत की दुकानों के नियम अनुसार अन्य किसी किराएदार या अन्य किसी को बिक्री नहीं की जा सकती लेकिन गत अनेक वर्षों से राजनीतिक संरक्षण व बाजार विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की साठगाठ से बड़े पैमाने पर नगर परिषद मालकियत की दुकाने दूसरों को बिक्री कर उसके नाम से किराएदार के रूप का ट्रांसफर किया गया है जो कि अनधिकृत है। जिसकी जांच किये जाने पर अनेक बड़े ख़ुलासे हो सकते है।
जबकि यदि कोई व्यक्ति किराएदार दुकान नहीं चला सकता तो उसे नगर परिषद प्रशासन को वापसी देना होता है लेकिन अब तक एक भी किराएदार ने दुकान नहीं दिया है।

विरोधी कर रहे भ्रम की स्थिति निर्माण, नियमानुसार कार्यवाही
गोंदिया नगर परिषद मालकियत की किराए की दुकान को लेकर हमेशा विवाद की स्थिति निर्माण होती है इसमें बड़े पैमाने पर राजनीतिक संरक्षण व बाजार विभाग के अधिकारियों द्वारा पैसे का लेनदेन कर अवैध रूप से मंजूरी देने का कार्य किया जाता है।
हाल ही में नगराध्यक्ष सचिन सेन्डे वह मुख्य अधिकारी द्वारा जारी किए गए नोटिस में नियम अनुसार 9 वर्षों के पश्चात दुकान रिनिवल करवाने हेतु तथा नए एसेसमेंट से वर्तमान किराए की दर लागू करने के लिए कार्रवाई की गई है किंतु विरोधी लोग इसमें भ्रम की स्थिति निर्माण कर रहे हैं।
शासन के नियम अनुसार ही किराए की दर तय कर वर्तमान किरायेदारों को ही दुकान दी जाएंगे
तथा जिन्होंने बिना मंजूरी के अवैध रूप से निर्माण करवाया है उनका नए सिरे से असेसमेंट कर जितना निर्माण कार्य किया गया है उसका स्क्वायर फीट के हिसाब से पुराना वह नया किराया वसूल करने के साथ ही जुर्माना वह 5 गुना अधिक किराया लिया जाएगा।
– सचिन सेन्डे नगराध्यक्ष नगर परिषद गोंदिया

बाजार विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह
गोंदिया नगर परिषद मार्केट की दुकानों का रखरखाव किराया वसूली गोंदिया नगर परिषद के बाजार विभाग द्वारा की जाती है लेकिन बाजार विभाग में प्रमुख के तौर पर तत्कालीन कर्मचारी मुकेश मिश्रा द्वारा अनेक वर्षों सेविभाग कुंडली मारकर बैठा था तथा इसके द्वारा अवैध रूप से दुकानों का हस्तांतरण व अवैध रूप से दुकान के नवनिर्माण की मंजूरी देकर नगर परिषद के राजस्व को चूना लगाने का कार्य किया गया जिसकी भी जांच की जाना आवश्यक है।
इस कारण नगर परिषद बाजार विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह निर्माण हो रहा है इस मामले में बाजार विभाग का संपूर्ण स्टाफ बदलकर नए सिरे से अन्य कर्मचारियों को बाजार विभाग में नियुक्त कर कड़ाई से नियमों का पालन करना आवश्यकहै।

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