19 करोड़ 42 लाख रुपए के 84 कार्यों का बंदरबाट,जीप बांधकाम विभाग ने मजदूर सहकारी संस्था को किया वितरित ,सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता वह पंजीकृत ठेकेदारों को नजर अंदाज शासन के जी.आर का खुलेआम उल्लंघन

बुलंद गोंदिया। राज्य शासन द्वारा जिले के विभिन्न विकासात्मक कार्यों के लिए जिला परिषद के सार्वजनिक बांधकाम विभाग को 19 करोड़ 42 लाख रुपए के 84 विभिन्न कार्य आठ लेखा शीर्ष के अंतर्गत जारी किए गए। जिसमें सभी कार्य शासन के आदेशानुसार सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता, पंजीकृत ठेकेदार वह मजदूर सहकारी संस्थाओं को वितरित किया जाना था,लेकिन इसमें भारी भ्रष्टाचार व कमीशन खोरी के चलते शासन के जी.आर का खुलेआम उल्लंघन कर जिला परिषद सार्वजनिक बांधकाम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सभी कार्य मजदूर सहकारी संस्थाओं को वितरित किए गए जिसकी टेंडर प्रक्रिया 3 मार्च2025 को हो चुकी है।

गौरतलब है की जिले के विकास के लिए शासन द्वारा 8 लेखा शीर्ष अंतर्गत 84 कार्य 19 करोड़ 42 लाख रुपए के मंजूर किए गए थे। यह सभी कार्य जिला परिषद के माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किए जाने हैं। जिसकी टेंडर प्रक्रिया 3 मार्च 2025 को जिला परिषद के सार्वजनिक बांधकाम विभाग द्वारा की गई है, लेकिन इन कार्यों में भ्रष्टाचार व कमीशन खोरी के चलते शासन के जीआर का उल्लंघन कर किया गया है तथा सभी कार्य मजदूर सहकारी संस्था को वितरित कर सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता वह पंजीकृत ठेकेदारों को इससे वंचित रखा गया।

शासन के आदेश अनुसार इन कार्यों में सुशिक्षित बेरोजगार अभियंताओं को 40%, सामान्य पंजीकृत ठेकेदारों को 34% वह मजदूर सहकारी संस्थाओं को 26% कार्यों का वितरण किया जाना था , लेकिन जिला परिषद के सार्वजनिक बांधकाम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन नियमों का पालन न कर शासन आदेश का खुलेआम उल्लंघन किया गया है तथा 19 करोड़ 42 लाख रुपए के सभी 84 कार्य मजदूर सहकारी संस्था को वितरित कर टेंडर प्रक्रिया कर दी गई।
19 करोड़ 42 लाख रूपए के 84 कार्य

1) लेखा शीर्ष 5054 जिला वार्षिक योजना – कार्य 51 राशी- 13 करोड़ 67 लाख रुपए
2) लेखा शीर्ष 3054 जिला वार्षिक योजना – कार्य14 राशी 2 करोड़ 24 लाख रुपए
3) लेखा शीर्ष 3054 जिला रास्ते किसान गर्जना आदिवासी – कार्य 05 राशी 71 लाख 28 हजार रुपए
4) लेखा शीर्ष प्रादेशिक पर्यटन विकास योजना- कार्य 05 राशी 1 करोड़ 67 लाख रुपए
5) लेखा शीर्ष जिला जीवायओ तीर्थ क्षेत्र विकास – कार्य 01 राशी 19 लाख रुपए
6) लेखा शीर्ष 2515 लोक प्रतिनिधि – कार्य 02 राशी 25 लाख50हजार रूपए
7) लेखा शीर्ष आपत्ति सौम्यीकरण – कार्य01 राशी 14 लाख 80 हजार रुपए
8) लेखा शीर्ष डॉ बाबासाहेब सा.वि.यो कार्य 01 राशी 11 लाख 80 हजार रुपए
8) लेखा शीर्ष 15 वा वित्त आयोग – कार्य 04 राशी 56 ला ख रुपए का समावेश है।

उपरोक्त कार्यो को शासन के जी आर के अनुसार टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से तीनों प्रवर्गों को वितरण किया जाना था लेकिन जिला परिषद सार्वजनिक बांधकाम विभाग के कार्यकारी अभियंता, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, वित्त व लेखा अधिकारी द्वारा उपरोक्त कार्यो को विभाजित ना कर सिर्फ मजदूर सहकारी संस्थाओं को वितरित किया गया है।
जिसके चलते सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता व पंजीकृत ठेकेदारों में आक्रोश निर्माण हो रहा है। इस मामले में ठेकेदारों द्वाराअधिकारियों की साठगाठ व राजनीतिक दल के पदाधिकारी को लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रकार का भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप जिला परिषद परिसर में ठेकेदारों व सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता द्वारा लगाते हुए देखा जा रहा है।

शासन व वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित में दी जानकारी
सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता व सामान्य पंजीकृत ठेकेदारों के साथ किए गए इस अन्याय को लेकर सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता संघटना के अध्यक्ष अजय सेंगर, सचिव महेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष अजय टाह, तहसील अध्यक्ष गोरेगांव राजू पारधी, तहसील अध्यक्ष सड़क अर्जुनी रुपेश शर्मा तथा राज्य प्रतिनिधि देवेंद्र तिवारी तिरोडा द्वारा जिलाधिकारी व जिला परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के साथ आयुक्त नागपूर विभाग , कार्यकारी अभियंता गोंदिया सभी वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित में इसकी सूचना दी गई है।

कुशल कार्य बेरोजगार अभियंता व पंजीकृत ठेकेदारों को
शासन के नियम अनुसार कुशल व अ कुशल कार्यों का वर्गीकरण किया गया है जिसमें कुशल कार्य के अंतर्गत पक्के सीमेंट मार्ग, कंक्रीट कार्य वह नए बांध काम जैसे कार्य बेरोजगार अभियंता वह पंजीकृत ठेकेदारों को ही वितरित किए जाते हैं तथा मजदूर सहकारी संस्थाओं को अ कुशल कार्य मिट्टी, नाली, मुरुम वह खड़ीकरण जैसे कार्य दिए जाते हैं, किंतु इस मामले में कुशल कार्य भी मजदूर सहकारी संस्था को वितरण किए गए हैं जिससे स्टैंडर्ड प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह
शासन की विकास निधि को भी जनप्रतिनिधि द्वारा अपनी विकास निधि बताकर अपने कार्यकर्ताओं को देने के लिए मजदूर सहकारी संस्था के माध्यम से कार्यों का वितरण किया जाता है। जिसमें कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है प्रतिवर्ष करोड रुपए की विकाश निधि का बंदर बाट होने के साथ ही घटिया कार्य जिले में हो रहे हैं जिससे आम जनता के टैक्स की राशि का भी जनप्रतिनिधियों व नेता व सत्ता पक्ष द्वारा खुले हम दुरुपयोग किया जाता है।

शासन नियमानुसार कार्यों को तीन श्रेणियां में विभाजित
शासन नियमानुसार कार्यों को तीन श्रेणियां में विभाजित किया गया है उपरोक्त कार्य में 40%कार्य सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता 34% सामान्य पंजीकृत ठेकेदार वह 26% कार्य मजदूर सहकारी संस्थाओं को वितरण किया जाना चाहिए था लेकिन इन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।

प्रशासक राज से लिखी भ्रष्टाचार की नई पटकथा
जिला परिषद में वर्ष 2019 में कोविड के चलते चुनाव न होने के कारण प्रशासक राज लगा था उसके पूर्व शासन के कार्यों को नियमानुसार वितरित किया जाता था। लेकिन तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी पाटिल व अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी पुंड के प्रशासक राज में भ्रष्टाचार की नई पटकथा लिखकर एक नई प्रथा शुरू की गई जिसमें सभी विभागों के प्रमुखों, सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता, सामान्य पंजीकृत ठेकेदार वह मजदूर सहकारी संस्था के प्रतिनिधियों की संयुक्त सभा ना लेकर मनमर्जी मनमानी तरीके से कार्यों का वितरण अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। पदाधिकारी की नई कार्यकारिणी आने के पश्चात इस प्रथा में सुधार होने की बजाय स्थिति और खराब हो चुकी है तथा अभी वही भ्रष्टाचारी रवैया जिला परिषद के सभी महकमें में चल रहा है।

       कानूनी नोटिस दिया
जिला परिषद के सार्वजनिक बांधकाम विभाग द्वारा कार्य वितरण में भारी गड़बड़ी की गई है तथा सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता व सामान्य ठेकेदारों को नजर अंदाज कर मजदूर सहकारी संस्थाओं को संपूर्ण कार्य वितरण किया गया है इस संदर्भ में कानूनी नोटिस दिया गया है।
– अजय सेंगर अध्यक्ष सुशिक्षित बेरोजगार अभियंता संघटना गोंदिया जिला।

: न्यायालय में याचिका दाखिल
जिला परिषद के सार्वजनिक बांधकाम विभाग द्वारा सुशिक्षित बेरोजगार अभियंताओं के साथ किए गए अन्य के खिलाफ उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में मामला दर्ज किया गया तथा न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर ली है जिसमें शिकायतकर्ता संजय औकटे, महेश अग्रवाल, अजय सेंगर वह अजय टाह है।
– महेश अग्रवाल सचिव सुक्षित बेरोजगार अभियंता संघटना गोंदिया जिला।

            शासन के नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया व कार्य वितरण
शासन के नियमानुसार कार्यों का वितरण कर टेंडर प्रक्रिया किया गया है।
– तानाजी लोखंडे अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद गोंदिया

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