बुलंद गोंदिया। कोरोना संक्रमण काल में किसानों की स्थिति वैसे ही दयनीय हो चुकी हैं। साथ ही आगामी खरीफ मौसम की फसल लगाने का कार्य भी जल्द ही शुरू होगा ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा खाद की कीमतों में 30 से 55% की बढ़ोतरी कर दी है। जिससे खाद निर्माता कंपनियों द्वारा भी खाद की कीमतों में काफी बढ़ोतरी कर दी है। एक और तो केंद्र सरकार किसानों की फसल का उत्पादन दुगना करने की बात करती है। लेकिन किसानों का उत्पादन डबल तो नहीं हुआ खाद की कीमतें बढ़ने से उनकी उत्पादन लागत जरूर डबल हो गई है। वर्ष भर लॉकडाउन के चलते सब्जी, फल आदि कृषि उपज के भाव काफी कम हो गए हैं ।वहीं दूसरी ओर खाद की कीमतें बेतहाशा बढ़ गई है जिससे किसान जीवित कैसे रहे इस पर प्रश्नचिन्ह निर्माण हो रहा है। एक और तो सरकार बोल रही है कि हमने खाद के दाम नहीं बढ़ाए कंपनियों ने बढ़ाए हैं। किंतु किसान को ही नुकसान होगा अतः सरकार द्वारा खाद की बढ़ी हुई कीमतों को जल्द से जल्द वापस लें साथ ही पेट्रोल डीजल की हो रही दर बढ़ोतरी को कम करें अन्यथा विदर्भ राज्य आंदोलन समिति द्वारा इसके खिलाफ आंदोलन किया इस प्रकार के निवेदन का पत्र प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी को सौंपकर मांग की गई। निवेदन देने वालों में में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के जिला अध्यक्ष सुनील तिवारी, दीपा काशीवार ,प्राची, अर्चना ठाकरे, आदि पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा मांग की गई है।
खाद की बढ़ी हुई कीमतें कम करें विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने प्रधानमंत्री के नाम दिया ज्ञापन कीमतें कम ना होने पर आंदोलन की चेतावनी





