बुलंद गोंदिया। कोरोना महामारी ने संपूर्ण विश्व को अपने प्रकोप से ग्रसित कर दिया है, अनेकों के जीवन को अंधकारमय कर दिया है, परंतु प्लाज्मा कहीं ना कहीं अंतिम उपचार के रूप में संजीवनी बूटी का काम कर रहा है। जिसके लिए गोंदिया पहल प्लाज्मा की अभियान में युवा वर्ग बढ़-चढ़कर प्लाज्मा दान हेतु आगे आने का आव्हान रिया गाजीपुरे ने किया।
सुना था,
“इंसान इंसान के काम आता है…”
कोरोना ने दिखा भी दिया, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाइयां, वैक्सीन, सब मशीनीकरण द्वारा निर्माण हो सकते हैं, परंतु रक्त और प्लाज्मा नहीं…
यह केवल मनुष्य के शरीर में ही निर्मित हो सकता है, जो दूसरे मनुष्य की जान बचा सकता है।
प्लाज्मा दान की प्रक्रिया-
यदि कोई भी व्यक्ति कोरोना गृसित होकर ठीक हो चुका है तो उसके शरीर में कोरोना से लड़ने के तत्व मौजूद होते हैं, जिसके माध्यम से यदि उस व्यक्ति का रक्त प्लाज्मा के रूप में ग्रसित व्यक्ति को चढ़ाया जाए तो ग्रसित व्यक्ति ठीक हो सकता है।
प्लाज्मा दान से पूर्व एंटीबॉडी टेस्ट आवश्यक है, यदि उस टेस्ट में 4.0 से अधिक स्कोर आता है, तो प्लाज्मा डोनेट किया जा सकता है, कभी-कभी जिसे कोरोना नहीं हुआ है, वह भी प्लाज्मा दे सकते हैं, आवश्यक है कि उनकी एंटीबॉडी टेस्ट का स्कोर 4.0 से अधिक आना चाहिए।
महिलाओं द्वारा भी प्लाज्मा दान किया जा सकता है, यदि उन्होंने किसी संतान को जन्म नहीं दिया है, कुंवारी कन्याओं द्वारा भी प्लाज्मा दान किया जा सकता है।
15- 15 दिन में प्लाज्मा दान किया जा सकता है, क्योंकि तुरंत रक्त से प्लाज्मा निकलकर उसी नली द्वारा रक्त शरीर में वापस चले जाता है, जिससे शरीर में रक्त की कमी नहीं होती।
इसी श्रंखला में गोंदिया पहल प्लाज्मा की… द्वारा गोंदिया शहर में प्लाज्मा की पूर्ति हेतु अत्यंत सराहनीय कार्य किया जा रहा है, आप सभी से नम्र निवेदन है कि इस महायज्ञ में आहुति देकर जरूर सहयोग करें।
युवा वर्ग बढ़-चढ़कर प्लाज्मा दान हेतु आगे आएं, जिससे हमारे शहर में किसी को भी प्लाज्मा की कमी के चलते किसी अपने को ना खोना पड़े।






