गुदमा-प्रताप बाग रेलवे लाइन भूमि अधिग्रहण मट्टी मोल मुआवजा पीड़ित किसानों ने किया गोंदिया बालाघाट मार्ग जाम

बुलंद गोंदिया। गुदमा से प्रतापबाग तक नई रेलवे लाइन के लिए राजस्व विभाग द्वारा जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है जिसका मूल्य कौड़ियों के भाव देने से किसानों में आक्रोश निर्माण हो गया। इस संदर्भ में अनेको बार निवेदन देने के बावजूद भी अधिकारियों के तानाशाही रवैया के खिलाफ किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति के तत्वाधान में 7 सितंबर सोमवार को गोंदिया बालाघाट मार्ग पर रास्ता रोको आंदोलन कर घंटो तक मार्ग जाम किया ।

गौरतलब है की रेलवे प्रशासन द्वारा गोंदिया जिले में गुदमा से प्रतापबाग तक नई रेलवे लाइन के लिए कटंगी कला, नागरा, हल्बीटोला, सावरी, गर्रा , गोंदिया खुर्द, पोवारीटोला दतोरा, खमारी, चुलोद की जमीन अधिग्रहण के लिए राजस्व विभाग से मांग की थी जिस पर राजस्व विभाग द्वारा इन ग्रामों की किसानों की जमीन को अधिग्रहण कर इसके मुआवजे का पत्र किसानों को दिया गया लेकिन जब किसानों को पत्र प्राप्त हुआ तो उन्हें जानकारी मिली कि उनके जमीन का भाव शासन द्वारा बाजार मूल्य से न लगाकर मनमाने तरीके से कौड़ियों के भाव लगाकर दिया जा रहा है।

शासन के तानाशाही रवैया से परेशान होकर आक्रोशित किसानों द्वारा किसान जमीन बचाव संघर्ष समिति के तत्वाधान में कटंगी नाके पर रास्ता रोको आंदोलन किया गया. इस दौरान आंदोलनकारी ने मांग की की रेलवे प्रशासन व किसानों के बीच में से गोंदिया के उप विभागीय अधिकारी को दलाल के रूप में हटाया जाए तथा किसानों को डायरेक्ट रेलवे प्रशासन द्वारा मुआवजा दिया जाए जो की बाजार कीमत से 5 गुना हो।
इस दौरान आंदोलनकारियो से गोंदिया के उपविभागी अधिकारी चंद्रभान खंडाईत द्वारा मुलाकात कर उनकी मांगों को सरकार व रेलवे प्रशासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया इसके पश्चात आंदोलनकारीयो ने अपना आंदोलन वापस लिया तथा उनकी मांगे पूरी न होने पर आगे और कड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी।
पुलिस का कड़ा बंदोबस्त
आंदोलन के दौरान पुलिस का कड़ा बंदोबस्त रखा गया तथा इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वाहनों का मार्ग डायवर्ट किया गया हालांकि 2 घंटे से अधिक आंदोलन चलने के दौरान वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन किसानों की इस जायज मांग को देखते हुए उन्होंने भी अपना समर्थन किसानों को दिया

उपरोक्त आंदोलन में शामिल किसानों द्वारा काले दुपट्टे पहनकर भजन गाकर वह हनुमान चालीसा का पाठ कर आंदोलन किया किया तथा आंदोलन के दौरान अति आवश्यक सेवा एंबुलेंस फायर ब्रिगेड जैसी गाड़ियों को नहीं रोका गया
इस आंदोलन में समिति द्वारा प्रशासन से मांग की गई कि जिनकी जमीन प्लाट दुकान अधिगृहीत हो रही है उन्हें शासकीय नौकरी दी जाए, जमीन प्लाट मकान का मूल्य बाजार भाव से 5 गुना दिया जाए, जिनकी आधी जमीन जा रही है उनकी पूरी जमीन का मुआवजा दिया जाए ,रेलवे के कारण खेतों के पानदान रास्ते बंद हो रहे हैं उसके बदले नया रास्ता बनकर दिया जाए।
रास्ता रोको आंदोलन में किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अखिलेश सेठ, डॉक्टर अमित बुद्धे, नंदू बिसेन,गोपाल चुटे, कार्तिक चौहान, सौ पूजा सेठ, श्याम राव बुद्धे, सुमित बुद्धे, गोल्डी गावंडे, सूरज बावनकर, छोटू पंचबुद्धे, सुप्रित बैस, राजेश नागरिकर ,रसिक पटेल, मोहिनी वराहृडे,हंसराज लिल्हारे राजू चन्नेकर राजू बिसेन गोपाल चुटे कुलदीप पटले, सरला चिखलोंडे लिखेश चिखलोंडे कीर्ति पटले शिवलाल नेवारे, मुरली नागपुरे जीतू लिल्हारे, विष्णु नागरिकर, जनार्दन बनकर धनलाल नागपुरे नानू चिखलोंडे, संजू बडवाईक, अय्यूब शेख,सहित 12 ग्रामों के सैकड़ो की संख्या में नागरिक उपस्थित थे ।

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