पितृ मोक्षार्थ श्रीमद् भागवत कथा वह गया श्राद्ध महोत्सव के आयोजनों का स्वर्णिम इतिहास चांगरोड़िया परिवार ने 140 वर्षों में किये 11 आयोजन

बुलंद गोंदिया। पितृमोक्षार्थ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान एवं वह श्री गया श्राद्ध महोत्सव का आयोजन चांगरोड़िया परिवार हरियाणा व गोंदिया द्वारा 140 वर्षों से निरंतर कर रहा है, इस वर्ष 11वां आयोजन के तहत श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्री रानी सती मंदिर नारायणी लांन में 12 सितंबर में किया जा रहा है।

हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों की मुक्ति व उनकी तृप्ति के लिए वर्तमान बिहार राज्य के गया में श्राद्ध और पिंडदान करने का सर्वोच्च महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार अन्य स्थानों पर बार-बार पिंडदान करने से जो फल प्राप्त होता है उससे भी उत्तम और पूर्ण फल गया में एक बार विधि विधान से किए गए श्रद्धा से प्राप्त होता है। गरुड़ पुराण में बताया गया कि मनुष्य के लिए मोक्ष के चार मार्ग हैं ब्रह्म ज्ञान, कुरुक्षेत्र में निवास ,गौशाला में मृत्यु और गया में श्राद्ध जिसमें सबसे ज्यादा प्रचलित गया श्राद्ध है जिसमें पितरों के तृप्ति व मोक्ष के लिए गया श्राद्ध का धार्मिक महत्व बताया गया है।

इसी परंपरा का पालन करते हुए परम आराध्य मां भगवती खुडानावाली वह भगवान श्री हनुमान जी के परम भक्त सेठ चौधरी मंसाराम चांगरोड़िया के वंशजों द्वारा 140 वर्षों से अनवरण पितृ मोक्षार्थ श्रीमद् भागवत व गया श्राद्ध की परंपरा आज भी श्रद्धापूर्वक वह पूर्ण विधिविधान के साथ निर्वाह किया जा रहा है।

]
चांगरोड़िया परिवार द्वारा श्रीमद् गया श्राद्ध का प्रथम आयोजन चांगरोड़िया हरियाणा में वर्ष 1886 में संपन्न किया गया था।
उल्लेखनीय है की इस आयोजन की मुख्य बात यह है कि वर्तमान चांगरोड़िया परिवार के पूर्वजों द्वारा श्री गया जी तक पदयात्रा 45 दिनों में पूर्ण की थी उसके बाद से अब तक 10 आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं, तथा 11वां आयोजन 12 सितंबर 2026 गोंदिया में आयोजित किया जा रहा है।
जिसके लिए श्री रानी सती मंदिर नारायणी लॉन में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया है।
पितृ मोक्षार्थ श्रीमद् भागवत कथा के समापन के पश्चात संबंधित परिजन अपने पितरों को लेकर गया के लिए प्रस्थान कर श्राद्ध पक्ष में गया में रहकर उनका पिंडदान व तर्पण कर श्राद्ध कर्म करेंगे।

चांगरोड़िया परिवार द्वारा अब तक जो 10 आयोजन किए गए उनका विवरण इस प्रकार है।
प्रथम आयोजन चांगरोड़िया हरियाणा में 1886
द्वितीय आयोजन चांगरोड़िया हरियाणा में 1907
तृतीय आयोजन चांगरोड़िया हरियाणा में 1920
चतुर्थ आयोजन चांगरोड़िया हरियाणा में 1945
पांचवा आयोजन गोंदिया महाराष्ट्र 1955
छटवा आयोजन गोंदिया महाराष्ट्र 1970
सातवां आयोजन गोंदिया महाराष्ट्र 1987
आठवां आयोजन गोंदिया महाराष्ट्र 1997
नवम आयोजन गोंदिया महाराष्ट्र 2007 तथा
दसवां आयोजन गोंदिया महाराष्ट्र 2016 में किया गया था।
इसी परंपरा की श्रृंखला को सहजते हुए व आगे बढ़ाते हुए चांगरोड़िया परिवार द्वारा इस वर्ष भी 2026 में श्रीमद् गया श्राद्ध का 11वां आयोजन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय की भारत में चांगरोड़िया परिवार द्वारा अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित प्रति दशक में श्रीमद् भागवत व श्रो गया श्रद्धा का आयोजन कर सनातन परंपरा का पूर्ण रूप से निर्वहन किया जा रहा है। श्रद्धेय पितृगणों के आशीर्वाद का यह फल है कि परिवार के ही 325 परिवार जो कि भारत के विभिन्न शहरों में रहकर भी एक सूत्र में बंधे हुए हैं।
22 वर्षों से कुलदेवी महोत्सव
गया श्राद्ध परंपरा के साथ ही चांगरोड़िया परिवार की एक और उपलब्धि दर्ज है जिसमें गत 22 वर्षों से परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की पहल पर एक नई परंपरा की नीव डाली गई थी जिसमें कुलदेवी महोत्सव मनाने के आयोजन की शुरुआत की गई व चांगरोड़िया परिवार द्वारा प्रतिवर्ष निरंतर कुलदेवी महोत्सव का आयोजन कर रहा है।

Share Post: